तमिलनाडु में राजनीतिक हलचल तेज, AIADMK नेताओं के बीच बढ़ सकती है नजदीकी
चेन्नई | तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी एआईएडीएमके (AIADMK) के भीतर चल रही आपसी कलह अब शांत होती दिखाई दे रही है और गुटों के बीच समझौते की कोशिशें तेज हो गई हैं। राज्य के राजनीतिक समीकरणों में उस समय बड़ा बदलाव आया जब मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने अपने कैबिनेट का विस्तार करते हुए गठबंधन सहयोगी दलों—वीसीके (VCK) और आईयूएमएल (IUML)—के विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। इस नए सियासी घटनाक्रम के बाद एआईएडीएमके के असंतुष्ट खेमे की रणनीति बदल गई है और पार्टी में एकजुटता वापस लाने के लिए बातचीत के दरवाजे खुल गए हैं।पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, दोनों गुटों को एक मंच पर लाने के लिए वरिष्ठ नेताओं और शुभचिंतकों की मध्यस्थता में अनौपचारिक बातचीत शुरू हो चुकी है। यह मध्यस्थ दल एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) के नेतृत्व वाले मुख्य धड़े और सी. वे. शनमुगम व एस.पी. वेलुमणि की अगुवाई वाले बागी गुट के बीच के मतभेदों को सुलझाने में जुटा है।
समझौते के लिए दोनों गुटों ने रखीं अपनी शर्तें
सुलह की इस बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए ईपीएस (EPS) खेमे ने विद्रोही गुट के सामने एक बड़ी शर्त रखी है। इसके तहत बागियों को चुनाव आयोग में पार्टी के खिलाफ दी गई अपनी शिकायत वापस लेनी होगी। दूसरी तरफ, असंतुष्ट नेताओं ने भी अपनी मांग सामने रखते हुए कहा है कि हाल ही में की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई के दौरान जिन पदाधिकारियों को पार्टी से निकाला गया था, उन्हें दोबारा उनके संगठनात्मक पदों पर बहाल किया जाए। इन शर्तों के बीच दोनों पक्षों में आपसी समझ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
कैबिनेट विस्तार के बाद बदले सियासी समीकरण
पार्टी में पुनर्मिलन की यह हलचल मुख्यमंत्री विजय द्वारा मंत्रिमंडल में किए गए फेरबदल के तुरंत बाद देखी गई। मुख्यमंत्री ने वीसीके के विधायक वन्नी अरसु और आईयूएमएल के विधायक ए.एम. शाहजहां को अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया है, जिससे राज्य में मंत्रियों की कुल संख्या 35 हो गई है। इस विस्तार के ठीक बाद बागी गुट के नेता एस.पी. वेलुमणि के सुर बदलते नजर आए। उन्होंने सार्वजनिक रूप से बयान दिया कि एआईएडीएमके में कोई बिखराव या विभाजन नहीं है, और उन्होंने ईपीएस से हालिया चुनावों में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन की समीक्षा के लिए चर्चा शुरू करने की अपील की।
चुनाव चिह्न पर खतरे को लेकर बागी गुट की सफाई
विद्रोही खेमे ने चुनाव आयोग में 'चुनाव प्रतीक आदेश, 1968' के पैराग्राफ 15 के तहत एक याचिका दायर की थी, जिसे लेकर पार्टी में फूट की खबरें आ रही थीं। हालांकि, अब समझौते की सुगबुगाहट के बीच बागी नेताओं ने साफ किया है कि उनका इरादा एआईएडीएमके के पारंपरिक 'दो पत्ती' चुनाव चिह्न को फ्रीज (जब्त) कराने का बिल्कुल नहीं था। सूत्रों का कहना है कि यदि दोनों गुटों में सहमति बन जाती है, तो चुनाव आयोग से यह शिकायत वापस ले ली जाएगी। अब राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह अनौपचारिक बातचीत एआईएडीएमके को फिर से एक कर पाएगी।

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